शिविर समय-सारणी (निर्धारित)
यह घोषणा भविष्य की तिथि पर स्वतः प्रकाशित होगी — निर्धारित घोषणा का परीक्षण। (डेमो)
27 अक्टूबर 2026

तिलक, पुष्प और आत्मीय स्वागत — बच्चों में भारतीय संस्कृति और मूल्यों का बीजारोपण

विनम्रता, कृतज्ञता और सम्मान — ऐसी सीख जो जीवन भर साथ रहती है


अनुभवी मार्गदर्शकों के साथ बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास
3 दिवसीय
वार्षिक शिविर
संस्कार
मूल्य व संस्कृति
समाज
सेवा व सद्भाव
शिविर 2026
तिथि, पंजीकरण और तैयारियों की ताज़ा जानकारी
4 दिसंबर 2026 – 6 दिसंबर 20263 दिवसीय
इस वर्ष का संस्कार शिविर दिसंबर माह में आयोजित किया जाएगा। विद्यार्थी एवं मार्गदर्शक वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। शिविर स्थल, समय-सारणी एवं आवश्यक सामग्री की सूची शीघ्र ही घोषणाओं में प्रकाशित की जाएगी। (डेमो स…
34
दिन शेष हैं शिविर प्रारंभ होने में
2
विद्यार्थी पंजीकृत
1
मार्गदर्शक पंजीकृत
ज़िलेवार विद्यार्थी

हमारे बारे में
संस्कार शिविर रावल ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक शैक्षिक कार्यशाला है, जिसका उद्देश्य बच्चों में भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करना है।
प्रत्येक बालक-बालिका को संस्कारवान, आत्मविश्वासी और समाज के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाना।
कथा, खेल, योग, संवाद और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को परंपरा, अनुशासन, सेवा और सद्भाव की शिक्षा देना तथा उन्हें समाज से जोड़ना।
सूचना पट्ट
यह घोषणा भविष्य की तिथि पर स्वतः प्रकाशित होगी — निर्धारित घोषणा का परीक्षण। (डेमो)
27 अक्टूबर 2026
आगामी संस्कार शिविर हेतु विद्यार्थियों का ऑनलाइन पंजीकरण प्रारंभ हो गया है। कृपया समय रहते पंजीकरण करें और पुष्टि पर्ची सुरक्षित रखें। (डेमो)
20 अक्टूबर 2026
सभी पंजीकृत मार्गदर्शकों की तैयारी बैठक आगामी रविवार को प्रातः 10 बजे आयोजित होगी। (डेमो)
17 अक्टूबर 2026
प्रतिभागी अपने साथ आसन, पानी की बोतल, नोटबुक-पेन और मौसम के अनुसार वस्त्र लेकर आएँ। (डेमो)
10 अक्टूबर 2026
पिछले आयोजन
हमारे पिछले शिविरों की झलकियाँ और अनुभव
मार्गदर्शन
अनुभवी मार्गदर्शक जो बच्चों को संस्कार और ज्ञान से जोड़ते हैं
खेलकूद एवं टीम गतिविधियाँ
बाली, पाली
व्यक्तित्व विकास
सायला, जालोर
स्मृतियाँ
शिविर के यादगार पलों के एल्बम
अनुभव
“संस्कार शिविर के बाद मेरी बेटी सुबह जल्दी उठकर प्रार्थना करने लगी है और बड़ों का सम्मान करना उसकी आदत बन गया है। आयोजकों का हृदय से धन्यवाद।”
“तीन दिन कब बीत गए पता ही नहीं चला! योग, कहानियाँ और नए दोस्त — अगले साल फिर ज़रूर आऊँगा।”
“बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का यह एक सराहनीय प्रयास है। हर परिवार को अपने बच्चों को इसमें भेजना चाहिए।”
आगामी संस्कार शिविर के लिए आज ही पंजीकरण करें।